सीनियर सिटीजन के लिए फायदेमंद है एफडी, बिना जोखिम मिलता है हाई रिटर्न

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  • 9 Months ago
सीनियर सिटीजन के लिए फायदेमंद है एफडी, बिना जोखिम मिलता है हाई रिटर्न
HIGHLIGHTS

  • फिक्स्ड डिपॉजिट
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त लाभ
  • आवधिक ब्याज भुगतान
  • श्रीराम सिटी उच्चतम ब्याज दर प्रदान करता है


फिक्स्ड डिपॉजिट, जिसे एफडी के नाम से भी जाना जाता है, निवेश का एक बेहतरीन माध्यम है, जो आम लोगों के बीच बेहद प्रचलित है। फिक्स्ड डिपॉजिट सेफ इन्वेेस्टमेंट होने के साथ-साथ यह हाई रिटर्न का एक बड़ा साधन है। सीनियर सिटीजन (जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है) के लिए यह सबसे पसंदीदा इंवेस्टमेंट टूल है। आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद सीनियर सिटीजन जोखिम वाले निवेश के बजाय सेफ इन्वेेस्टमेंट की ओर रूख करते हैं, ताकि फिक्स्ड व रेग्युलर इनकम के साथ-साथ हाई रिटर्न भी प्राप्त किया जा सके। फिक्स्ड डिपॉजिट में सीनियर सीटीजन को आम नागरिकों की अपेक्षा ज्यादा ब्याज और टैक्स में छूट जैसे अधिक फायदे मिलते हैं। बैंकों में आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट के तहत 7 दिनों से लेकर 10 साल तक की अवधि तक के लिए निवेश की सुविधा मिलती है। वहीं, बैंक सीनियर सिटीजन को इस निवेश पर 50 आधार अंक (Bps) अधिक देते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट 

फिक्स्ड डिपॉजिट दीर्घकालिक और अल्पकालिक, दोनों निवेशों के लिए उपयुक्त है। फिक्स्ड डिपॉजिट का रिटर्न निश्चित होता है, क्योंकि इसकी ब्याज दर भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। इस पर महंगाई का कोई असर नहीं होता है। अगर आयकर की बात करें तो निवेशकों के हाथों में फिक्स्ड डिपॉजिट रिटर्न कर योग्य होता है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत निवेश में छूट का लाभ हासिल किया जा सकता है। 

फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न पूर्व-निर्धारित होता है और यह पूरी अवधि के दौरान नहीं बदलता है। यह इंटरेस्ट रेट फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रकार या अवधि के आधार पर तय की जाती है। अधिकांश बैंक 1 से 5 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6 से 7 प्रतिशत का ब्याज देते हैं। इसमें निवेश की गई राशि एक निश्चित समय के लिए बंद रहती है। यदि उस अवधि से पहले पैसा निकाला जाता है तो एक निश्चित जुर्माना देना पड़ता है। अगर जोखिम की बात करें तो फिक्स्ड डिपॉजिट में कोई विशेष जोखिम नहीं होता। बैंकों के भंडाफोड़ की स्थिति में सभी बैंक खातों का बीमा 1 लाख रुपये तक होता है।

कैसे होता है फिक्स्ड डिपॉजिट? 

फिक्स्ड डिपॉजिट किसी बैंक या डाकघर में कराया जा सकता है। अगर बैंकों की बात करें तो आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट खाता उसी बैंक में खुलता है, जिसमें पहले से सेविंग अकाउंट, जिसे बचत खाता भी कहते हैं, होता है। कुछ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट करने से पहले लोगों को अपने यहां पहले बचत खाता खुलवाते हैं। लेकिन, कुछ ऐसे भी बैंक हैं जो सेविंग बैंक अकाउंट न होने पर भी फिक्स्ड डिपॉजिट की अनुमति देते हैं। यदि बैंक में पहले से ही आपका सेविंग अकाउंट नहीं है तो आपसे केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा जाता है। 

इसके लिए आपको पहचान पत्र के लिए पैन कार्ड और पता के प्रमाण पत्र के लिए मतदाता पहचान पत्र या पासपोर्ट आदि के साथ नवीनतम तस्वीरें देनी पड़ती हैं। इसके साथ ही केवाईसी फॉर्म भरकर देना पड़ता है। वेरिफिकेशन के लिए बैंक अधिकारी ऑरिजिनल डॉक्यूमेंट मांग सकते हैं, इसलिए इसे साथ ही रखें। सीनियर सिटीजन के तौर पर आपको उम्र का प्रमाण पत्र भी देना होगा, जिसकी जाँच बैंक के अधिकारी करेंगे। 

फिक्स्ड डिपॉजिट में नॉमिनेशन की सुविधा भी उपलब्ध होती है, ताकि निवेशक के नहीं रहने पर उसके नॉमिनी को निवेेश की रकम का भुगतान किया जा सके। इसलिए, फिक्स्ड डिपॉजिट कराते समय नॉमिनी का नाम स्पष्ट रूप से देना चाहिए।

मिलने वाले लाभ

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की न्यूनतम राशि अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग होती है, जबकि अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट में आम लोगों के मुकाबले सीनियर सिटीजन को हाई रिटर्न की पेशकश की जाती है। आमतौर पर सीनियर सिटीजन को आधा प्रतिशत अधिक ब्याज मिलता है। अलग-अलग बैंकों द्वारा अवधि के हिसाब से अलग-अलग ब्याज पेश किए जाते हैं, जो अधिकतम 9 प्रतिशत सालाना तक है। अपनी आवश्यकताओं के अनुसार, सीनियर सिटीजन अपने खर्चों को पूरा करने के लिए नियमित ब्याज लेने या मैच्योरिटी पर पूंजी के साथ एकमुश्त राशि लेने का विकल्प चुन सकते हैं। आज कल बैंक मैच्योरिटी पर ऑटो रिन्यूअल की सुविधा भी देते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर खाता खोलते वक्त अगर बैंक को कोई निर्देश नहीं दिए जाते हैं तो वह मैच्योरिटी की तारीख पर फिक्स्ड डिपॉजिट को अपने आप रिन्यू कर देता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट में अक्सर मैच्योरिटी से पहले निकासी की सुविधा भी मिलती है। अगर बच्चों की पढ़ाई, यात्रा, घर में शादी-ब्याह, घर की मरम्मत या मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालातों में फिक्स्ड डिपॉजिट से समय से पहले पैसे निकाले जा सकते हैं। हालाँकि, मैच्योरिटी से पहले राशि निकालने पर बैंक पेनाल्टी लगा सकते हैं। यह पेनाल्टी अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट पर लोन भी लिया जा सकता है। इस पर लिए जाने वाले लोन की अधिकतम सीमा फिक्स्ड डिपॉजिट का एक तय परसेंटेज होता है। यह परसेंटेज बैंकों में अलग-अलग हो सकता है।