फिक्स्ड डिपॉजिट बनाम म्यूचुअल फंड: कहां करें निवेश - श्रीराम सिटी

म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट: बेहतर निवेश विकल्प कौन सा है?

  • Fixed Deposit,Mutual Funds
  • 1 Months ago
म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट: बेहतर निवेश विकल्प कौन सा है?
HIGHLIGHTS

  • म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट: बेहतर निवेश विकल्प कौन सा है?
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (सावधि जमा)
  • म्यूचुअल फंड

भविष्य की सुरक्षा के लिए धन सृजन (वेेल्थ क्रिएशन) की जब बात आती है तो किसी भी सामान्य व्यक्ति का सबसे पहले ध्यान निवेश (इन्वेस्टमेंट) के परंपरागत तरीके, फिक्स्ड डिपॉजिट (सावधि जमा) पर जाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि पीढ़ियों से बचत के इसी तरीके को लोगों ने देखा और अपनाया है। लेकिन, आज निवेश (इन्वेस्टमेंट) के विभिन्न तरीके उपलब्ध हैं, जिनसे उच्च लाभ (हाई रिटर्न) प्राप्त किया जा सकता है। उच्च लाभ (हाई रिटर्न) के माध्यम से वेेल्थ क्रिएशन के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की अपेक्षा म्यूचुअल फंड को एक बेहतर विकल्प माना जाता है। दरअसल, फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दर (इंट्रेस्ट रेट) पूर्व निर्धारित होती है, जो पूरी अवधि में एक समान रहती है। इसलिए इसमें निवेश (इन्वेस्टेमेंट) से उच्च लाभ (हाई रिटर्न) की अपेक्षा रखने वाले लोगों को संतुष्टि नहीं मिलती। वहीं, म्युचुअल फंड बाज़ार पर आधारित होता है, जो दीर्घकालीन अवधि में फिक्स्ड डिपॉजिट की अपेक्षा उच्च लाभ (हाई रिटर्न) देता है। तो आइए, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड के लाभ और हानि को विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं:

फिक्स्ड डिपॉजिट (सावधि जमा)

फिक्स्ड डिपॉजिट को एफडी के नाम से भी जानते हैं। यह एक लोकप्रिय व सुरक्षित बैंक निवेश है, जो दीर्घकालिक और अल्पकालिक, दोनों निवेशों के लिए उपयुक्त है। फिक्स्ड डिपॉजिट का रिटर्न निश्चित होता है, क्योंकि इसकी ब्याज दर भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं। इस पर महंगाई का कोई असर नहीं होता है। अगर आयकर की बात करें तो निवेशकों के हाथों में फिक्स्ड डिपॉजिट रिटर्न कर योग्य होता है। हालांकि, आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत निवेश में छूट का लाभ हासिल किया जा सकता है।

ब्याज दर (इंट्रेस्ट रेट) की बात करें तो फिक्स्ड डिपॉजिट पर रिटर्न पूर्व-निर्दिष्ट है और यह पूरी अवधि के दौरान नहीं बदलता है। यह ब्याज दर (इंट्रेस्ट रेट) फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रकार या अवधि के आधार पर तय की जाती है, इसलिए इसमें उच्च ब्याज (हाई रिटर्न) की उम्मीद नहीं की सकती है। अधिकांश बैंक 1 से 5 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6 से 6.8 प्रतिशत का ब्याज देते हैं। इसमें निवेश की गई राशि (इन्वेस्टमेंट) एक निश्चित समय के लिए बंद रहती है। यदि उस अवधि से पहले पैसा निकाला जाता है तो एक निश्चित जुर्माना देना पड़ता है। अगर जोखिम की बात करें तो फिक्स्ड डिपॉजिट में कोई विशेष जोखिम नहीं होता। बैंकों के भंडाफोड़ की स्थिति में सभी बैंक खातों का बीमा 1 लाख रुपये तक होता है।

म्यूचुअल फंड

उच्च लाभ (हाई रिटर्न) की इच्छा रखने वाले निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड एक बेहतर विकल्प है। हालांकि,  उच्च लाभ (हाई रिटर्न) की उम्मीद रखने वाले लोगों को इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश की सलाह दी जाती है। म्यूचुअल फंड तीन प्रकार के होते हैं - डेट, इक्विटी और बैलेंस्ड। डेट म्यूचुअल फंड वे हैं जो अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड और बाकी इक्विटी मार्केट में निवेश करते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड इक्विटी बाज़ारों में अपनी संपत्ति का 65% से अधिक निवेश करते हैं और बाकी सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड और प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। जबकि बैलेंस्ड म्युचुअल फंड वे हैं जो आंशिक रूप से ऋण में और आंशिक रूप से इक्विटी फंड में निवेश करते हैं।

अगर अवधि की बात करें तो आपने कौन-सा फंड चुना है इस आधार पर म्यूचुअल फंड में लॉक-इन पीरियड निर्भर करता है। हालांकि, म्यूचुअल फंड में निवेश में निवेश हर व्यक्ति अपनी आवश्यकता के अनुसार, 1 दिन से लेकर 20 साल तक कर सकता है। इसमें आप मासिक या एकमुश्त निवेश कर सकते हैं, जो 500 रुपये से शुरू न्यूनतम राशि से शुरू होता है। आप जब चाहें तब इसे छोड़ भी सकते हैं। म्यूचुअल फंड का रिटर्न मुद्रास्फीति-समायोजित है, जो उच्च लाभ (हाई रिटर्न) अर्जित करने की अपनी क्षमता को बढ़ाता है और धन सृजन (वेल्थ क्रिएशन) में सहायक होता है। अगर आयकर (इनकम टैक्स) की बात करें तो म्यूचुअल फंड के मामलों में साल पूरा होने से पहले आपके द्वारा कमाये गए लाभ पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। म्यूचुअल फंड सीधे बाज़ार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें जोख़िम भी अधिक होता है।